Showing posts with label 04/15/10 9:09. Show all posts
Showing posts with label 04/15/10 9:09. Show all posts

Thursday, April 15, 2010

कुछ शब्द मेरे अपने (स्व:)

कुछ शब्द मेरे अपने (स्व:)
कौशार्य की विस्मृत कोमलता लौट आने को है,
बचपन के उमंग , उल्लास ,स्वच्छंदता ,गीत-नाद ,
उत्सव------ सब कुछ लुप्त हुए थे कभी ,
प़र साजन के प्रेम में भीगी ,
चपल खंजन-सी ,फुदकती,चहकती ,
नवयुवती अलसाने को है!
डॉ.शालिनीअगम
2002

कुछ शब्द मेरे अपने

दुःख तो साथी है मेरा , लम्बी पहचान है,
उसे मानने का मन है , वो है तो मैं हूँ,
यही तो है मेरा यथार्थ , यही तो है अपना सा,
हर-पल मेरा साया, कभी छोड़ता ना पीछा ,
दुःख कहती हूँ , तो आँखों में एक रस होता है,
निर्झर बहते अश्रु, कहते हैं कि मैं हूँ !
घावों को कुरेदती हूँ , तन में पीड़ा होती है,
कराहते बदन , कहते है कि मैं हूँ !
पीड़ा होती है , तो अस्तित्व का भान होता है ,
एकाकी , मायूस मन, कहते है कि मैं हूँ !
इस दुःख के बिना , मैं हो ही नहीं सकती,
बिना मांगे , बिन बुलाये भागा चला आता है,

मेरे सबसे पास , सबसे करीब ,
अब तो दुःख में ही , रस आता है,
मेरे होने में ही , मेरा दुःख नियोजित है,
क्योंकि मेरा दुःख है , तो में हूँ!
डॉ. शालिनीअगम
www,aarogyamreiki.com

!